Tuesday, May 27, 2014

ईमान जेल के अंदर है, और बाहर बेईमान है

अच्छे दिनों की शुरुआत…  

देखो दुनिया वालों क्या गज़ब देश की शान है
जग में सबसे उत्तम, ये भारत देश महान है

गौरव की बड़ी मिसाल इससे और क्या होगी 
ईमान जेल के अंदर है, और बाहर बेईमान है
देखो दुनिया वालों....... ....... …… …… … 

अब  टूटी  मन  की आस्था और टूटे  सारे भ्रम
ईश्वर  तू  भी आँखें मूंदे, कितना  मेहरबान है
देखो दुनिया वालों....... ....... …… …… … 

हर  हर मोदी, घर घर  मोदी, मोदी हर जुबां पर
दिन अच्छे और भी आएंगे, अभी से क्यूँ परेशान है
देखो दुनिया वालों....... ....... …… …… … … 









JAIL OVER BAIL

TO CALL CORRUPT A CORRUPT IS CRIME IN INDIA 

It was worth reading guys and I thought we must all read it to know the reason why Arvind Kejriwal chose not to pay the bond/surety. 





Subject: Why Arvind choose Jail over Bail.



Harassment of accused persons in criminal cases is incredible. They have to keep on appearing in courts again and again after signing a bond for their continued appearance. The proceedings keep on getting adjourned again and again for different reasons. Is this at all required under the procedure laid down in the code of criminal procedure? Most certainly Not. 

The CrPC permits an accused person to be represented by a lawyer of his choice. The code also permits the court to exempt the personal appearance of an accused represented by a lawyer. The Supreme Court has held that even for framing charges against an accused, his presence is not required and the lawyer’s presence is enough. The code provides that if the personal attendance of an accused is required on a particular date, like for his identification, the court can pass an order to require such personal attendance on that specific date. In summons cases, Sec 317 also permits the questioning of the accused being dispensed with. 

Thus an entire trial can be completed without requiring the presence of an accused on a single date. In fact it is only the lawyer who plays a role in the proceedings and the accused remains just a spectator. 

The question needs to be asked as to why in such situations, the magistrates insist on the personal presence of all accused persons on every date and get bond’s signed by the accused persons with or without sureties for their appearance on every date. 

It is true that this practice is in the interest of the members of the bar like me, because when the accused has to personally come on every date, he is bound to bring fee every time. 

One consequence of this practice is that each magistrate has to waste several hours of his time every day in deciding applications for exemption from appearance of a particular accused on a specific date for special reasons to be shown in an application. On the grant of such exemption, the matter gets adjourned to some other date. If an accused, in spite of the bond does not turn up on a particular date, the court has to issue a non bailable warrant for his arrest and production apart from initiating proceedings for the forfeiture of the bail amount. If an accused happens to be in jail and not on bail, the magistrate has to issue a production warrant and the jail staff has to bring the accused to the court. 

All this is totally unnecessary and the Bombay High Court has delivered a judgment giving a direction to all subordinate courts to exempt the personal appearance of all accused persons in all criminal cases. If however the personal presence of any particular accused is required on a specific date for a specific purposes the court can always make an order requiring a particular accused person to appear in person on a specific date. I am sure that this one simple directive must have doubled the disposal ofcases by each magistrate. What is however even more important is that the accused persons will be saved from the immense harassment of having to appear before the courts again and again. Their trauma of Tareekh pe Tareekh will be a thing of the past. 

If Arvind Kejriwal’s decision not to execute a bond for appearance and to go to jail instead secures a general directive from the supreme court to all criminal courts in the country on the lines of the directive given by the Bombay high court, it will bring enormous relief to millions of accused persons in the country. Then Arvind Kejriwal's stay in jail will not be in vain. 

Even though Sec 88 of CrPC give a discretion to the magistrate to require or not to require the execution of a bond by accused persons, few magistrates are willing to exercise this discretion. Some magistrates do not even understand that it is Sec 88 which applies to such situations and not Sec 436, which applies only to an arrested person who applies for his release by furnishing a bail bond. 

Shanti Bhushan

Wednesday, May 21, 2014

चुनाव के समय गर्जन और चुनाव के बाद हृदयपरिवर्तन

नरेंद्र मोदी का नया रूप 

चुनाव के दौरान कठोरता vs. चुनाव के बाद कोमलता 

राष्ट्र के नए प्रधान मंत्री मोदी साहब के कल के इस अति कोमल और संवेदनशील रूप ने पूरे भारत वर्ष को निश्चित ही स्तब्ध कर दिया होगा। कल लोकतंत्र के पवित्र मंदिर (संसद) में नरेंद्र मोदी ने कदम रखने से पहले इसकी सीढीयों पर सम्पूर्ण भावुकता और सम्मान का परिचय देते हुए दंडवत नमन किया। मुझे नहीं लगता किसी और नेता ने इस तरह भावुक होकर पदार्पण किया हो कभी संसद में। अगर किया है तो मैं इससे बिलकुल परिचित नहीं हूँ। निसंदेह, यह वो अभूतपूर्व और मार्मिक दृश्य था जिसने भारत के करोड़ों नागरिकों के ह्रदय को स्पर्श किया होगा। 

किसी नेता के ह्रदय में संसद के प्रति इंतना मान-सम्मान कोई साधारण घटना नहीं थी। ये वो अदभुत और मार्मिक दृश्य था जिसने केवल प्रशंसकों के मन को ही नहीं बल्कि विरोधियों के दिलो-दिमाग को भी प्रभावित करके उन्हें मंत्रमुग्ध कर लिया होगा। वास्तव में, मैं नरेंद्र मोदी का आंशिक रूप से ही प्रशंसक रहा हूँ पर फिर भी कल प्रभावित हुए बिना नहीं रहा। हाँ इतना ज़रूर है, अवसर मिलने पर मैंने कभी भी मोदी के भाषण और साक्षात्कार की कभी अवहेलना नहीं की। मैंने हर बार उन्हें इसलिए सुना है कि नए मुद्दे और विषय का उल्लेख भी हो सकता है इसमें। उत्सुकता सदा ही बनी रहती है मन में जैसे मैं अरविन्द केजरीवाल को हमेशा इसलिए सुनता आया हूँ क्योंकि उसके विचारों की सादगी, ईमानदारी और सरलता ने मुझे बेहद प्रभावित किया है। 

लाल कृष्ण अडवाणी ने कल संसद के सेंट्रल हॉल में मोदी को संसदीय दाल का नेता चुनते हुए, खुलकर अपने जीवन में पहली बार नरेंद्र मोदी की बेजोड़ प्रशंसा की। प्रशंसा के पुल बांधते ही रहे मानो बीजेपी मोदी के बिना आज तक अधूरी थी, इस प्रचंड बहुमत का श्रेय दिया, उसकी योग्यता के प्रति अपनी और अपनी पार्टी बीजेपी की ओर से अपार कृतज्ञता प्रकट की। क्षमा करें, बीजेपी के भीष्म पितामह अडवाणी के नेतृत्व ने मुझे तो कभी प्रभावित नहीं किया। अपने वक्तव्यों को वापस लेने में कोई जवाब नहीं उनका, चाहे गुजरात का विषय हो या शिवराज चौहान का। 

उनके इस नए रूप की भी समग्र भारत में किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि जो व्यक्ति एक समय नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा होते ही अपने स्वार्थ को पार्टी के हितों से ऊपर रखते हुए त्याग पत्र सौंप सकता है वो अब उसी व्यक्ति की इतनी प्रशंसा कैसे कर सकता है। इतना हृदय परिवर्तन! उनके मुंह से संसद के समक्ष मोदी की धाराप्रवाह तारीफ सुनने और देखने लायक थी। 


फिर नरेंद्र मोदी के सम्बोधन का समय आया। अगर आपने मोदी के अमेठी के भाषण को सुना हो तो आप भी कहेंगे की वो उनका सबसे उत्तेजक और भावुक भाषण था उस दिन तक का और प्रभावित होकर जिस पर मैंने विशेष पोस्ट भी लिखी मगर कल संसद में दिया गया मोदी साहब का आधे घंटे का पहला भावुक भाषण अब तक का सबसे उत्तम और सर्वोत्तम लगा मुझे। अपने शब्दों के कौशल और निपुणता से कल पूरी संसद और देशवासियों को मानो अपने वश में कर लिया हो। यही मोदी की लोकप्रियता का मुख्य बिंदु है। मानो संसद ने किसी धर्म गुरु की सभा का रूप ले लिया हो। सभी तन्मयता और एकाग्रता से ऐसे सुन रहे थे जैसे शिष्य गुरु को मुक्ति मन्त्र के लिए सुन रहे हों। 

मोदी के इस ऐतिहासिक भाषण में उनकी आँखों से आंसूं तक छलक आये और उनके कथनों में कई महत्वपूर्ण विषयों और विशेष बिन्दुओं का समावेश था जिसने देशवासियों ने बड़े गौर से सुना जिनमें उनका मूलमंत्र 'सबका साथ सबका विकास' 'मोदी का सदा आशावादी होना' 'बीजेपी पार्टी को माँ का दर्जा देकर उसकी सदा सेवा करना' बीजेपी की इस प्रचंड जीत को अपनी जीत न बताकर उसे बीजेपी की कई पीढ़ियों की मेहनत का परिणाम बताना' 'अपनी सरकार को गरीबों, पिछड़ों, उपेक्षित, शोषित लोगों की सरकार बताना' मोदी के भाषण के दौरान मैंने महसूस किया की संसद में दिए इस पहले भाषण में उन्हें २०१९ का चुनाव साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था। 

नरेंद्र मोदी के इस नए बदले हुए रूप को देख और उसके हृदयस्पर्शी शब्दों को सुनकर मैं भी दूसरों की तरह उतना ही प्रभावित हुआ जितने और सब, मगर विश्वास करने से पहले मेरे मष्तिष्क में कई सवाल बिजली की तरह तेजी से कौंधने लगे जैसे मोदी के माथे से लाल टीके का नदारद होना, मुस्लिम टोपी को पहनने से इंकार करना, लक्ष्य को पाने के लिए हिन्दू राष्ट्रवाद को पीछे धकेल देना, गुजरात की पुलिस तंत्र का एक स्त्री के ऊपर नज़र रखना, अरविन्द जैसे निष्ठावान नायक को एके-४९ और पाकिस्तान का एजेंट बताना, अपनी पत्नी का नाम २०१४ के चुनाव से पहले न लिखना, चुनाव में अदानी के हेलीकाप्टर में घूमना, करोड़ों अरबों रुपयों को गरीबों पर खर्च करने के बजाये चुनाव अभियान में विज्ञापनों में नष्ट कर देना, गुजरात में दंगो के लिए माफ़ी न मांगना, गुजरात में स्थानीय पुलिस का किसानों पर लाठी बरसाना, अदानी को गुजरात में कोड़ियों के भाव ज़मीन देना, बीजेपी में आज भी ३४% दागीयों का संसद में होना वगैरह वगैरह न जाने और कितने ऐसे सवाल हैं जिनके कारण मोदी जी पर इस समय तो भरोसा नहीं किया जा सकता। 

वादे तो बड़े बड़े किये मोदी महोदय जी ने अपने भाषण में पर अब देखना शेष है पूंजीपतियों के हितों को आने वाले समय में क़िस तरह रेखांकित किया जायेगा इस सरकार में उनके द्वारा, देश हित और चंद लोगों के हितों में क़िस् तरह अंतर किया जायेगा। मुकेश अम्बानी और कांग्रेस सरकार के बीच हुए गैस के इकरारनामे को देशवासियों के या उसके निजी हितों के दृष्टिकोण से देखा जायेगा। देखना शेष है की मोदी साहब की आँखें गरीबों के पेट और हितों पर कब तक रुकी रहती है या फिर से पहले के बीजेपी शासन की तरह जनता को बेवकूफ बनाया जायेगा।

दुनिया भर में मीडिया को लोकत्रंत्र के चार स्तम्भों में से एक मज़बूत स्तम्भ माना जाता है और भारत में २०१४ के चुनाव को एक ऐतिहासिक चुनाव का दर्जा तो मिल चुका है लेकिन इस चुनाव को मीडिया के नैतिक पतन के लिए भी सदा याद किया जाएगा जिसने खुफिआ षड्यंत्र के तहत स्वच्छ राजनीती के लिए चली देश में जनक्रांति की आंधी को बेरहमी से दमन कर दिया।

मैं मानता हूँ कि जन आंदोलन को किसी भी देश में  कुछ समय के लिए दमन किया जा सकता है मगर हमेशा के लिए नहीं।

SOME FIRE TURNS OUT TO BE THE SAVIOR, NOT THE DESTROYER ....

REAL FIRE OR COVER UP OF SINS

Just few days back, I was discussing with my family members that we might soon witness a few fire break-outs in some important government buildings or the other where crucial documents of prime importance would burn to ashes leaving behind no shred of evidence since it is believed largely that some corrupt govt. employees IN CONNIVANCE WITH THE HIGHER-UPS commit them deliberately to cover up their sins so that the investigators can never trace them for their malpractices. 

This morning again to my horror, I watched the sad news and reminded my family of the same fact that some fire took place at 7th floor of Shashtri Bhavan (named after 2nd Prime minister, Lal Bahadur Shashri) at about 9.40 am, a key government building where they have multiple ministries' offices like Mines, Corporate Affairs & social justice, chemicals and petrochemicals, culture, women and child development, youth affairs, coal, human resources development, information and broadcasting, Law and Justice etc. at Delhi. Luckily, there is no reportage of any casualty. To curb the damages, the fire engines were rushed to the spot & it took them about 1-2 hrs to control and extinguish the fire.

The fire started from the office of the Ministry of Tribal Affairs and spread to the adjoining offices of I & B and Child Development Ministry too. it is the subject of the news that stacks of important files have been brought to ashes by this fire. These kinds of fire break-outs might crop up more as they are rumored to offer the best escape rout to the corrupt bureaucrats and govt. employees for their sins.

It is very significant to discuss here that these kinds of dubious fires take place round about majorly at the early hour of the govt. offices before the entire staff enters the building. In majority, the timing and modus operandi are the common factors in such ravaging fires. And in the times of so much advancement, short-circuit issue is never tackled effectively with the help of state-of-the- art technology especially in the government buildings where there exist the documents of paramount importance. Surprisingly, the fire alarms installed with water sprayers in govt buildings hardly function at the time of such emergencies the way they do in private sectors. 

The main reason behind this particular fire is yet to be ascertained though as usual short-circuit issue is being discussed for it. However, the forensic experts have been sent to the spot to find out the real reason behind this fire. The extent of the loss in this fire is yet to be brought to the notice of media. 
The fires are believed to be the main cause of destruction of human lives and properties but in this context the fire has saved many corrupt politicians and bureaucrats of this country who deliberately plan and execute such horrendous fires to get away comfortably from the clutches of laws. 

Friday, May 16, 2014

WITH BJP'S LANDSLIDE VICTORY, THE COUNTRY FALLS IN THE SAME OLD RUT...

अप्रत्याशित और अभूतपूर्व विजय ! बीजेपी खेमे में हर्षो-उल्लास का वातावरण ! 
रामलीला मैदान की जनक्रांति, मोदी की लहर के सामने बनी केवल एक भ्रान्ति

MODI PROVED HE IS THE BEST
आम चुनाव के इस महापर्व और महायुद्ध के बाद १६ मई को आज आख़िर जीत हो ही गई बीजेपी की, वो भी पूर्णतया बहुमत के साथ। लेकिन इस जीत के साथ ही फिर से फीकी पड़ गई वो उम्मीद जो इस देश में स्वच्छ राजनीति के साथ एक नया बदलाव देखना चाहती थी। फिर वही सिलसिलेवार कांग्रेस के बाद बीजेपी और उसके बाद कांग्रेस और फिर से बीजेपी। जैसा देश आजतक चलता आया है ठीक वैसा ही चलेगा अगले पांच सालों तक। 

मोदी से थोड़ी बहुत आशा रखी जा सकती है, ज़्यादा नहीं क्योंकि बीजेपी ने १३ सितम्बर,२०१३ को जैसे ही उसके नाम की प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में घोषणा की तो गुजरात में अपनी छवि सुधारने के लिए मोदी ने तीन महीने बाद ही दिसंबर २०१३ को लोकायुक्त की नियुक्ति की घोषणा कर दी, जो पद एक दशक से गुजरात में खाली पड़ा था। उससे बड़ी उम्मीदें रखना इसलिए भी व्यर्थ होगा क्योंकि जो नेता सत्ता के शीर्ष पर होकर भी पिछले १२ सालों में गुजरात को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं कर पाया वो इस देश को पांच सालों में क्या मुक्त करेगा। वो केवल देश की उन्नति, तरक़्क़ी और विकास के राग का ही आलाप गायेगा बार बार अपने कार्यकाल में। मोदी की ईमानदारी की झलकियाँ आप मेरी पुरानी पोस्ट में भी पढ़ सकते हैं, इस पोस्ट में दोहराना ठीक नहीं होगा। 

अरविन्द केजरीवाल की जनक्रांति के बाद लगभग सबको विश्वास सा हो चला था कि अब देश की राजनीती पूर्ण रूप से बदलेगी यहाँ। इस तथाकथित महान देश की दिशा बदलेगी। थोड़ा बहुत बदलाव तो दिखने लगा था राजनैतिक पार्टियों के व्यवहार में क्रांति के पश्चात, मगर जिस क्रांतिकारी बदलाव की आशा थी वो न जाने इन नज़रों से कब तक कोसों दूर रहेगा। 
याद करो कांग्रेस ने क्या कहा था कि चाय वाला कभी PM नहीं बन सकता 
आज कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज, चतुर-चालाक नेतागण इस महत्वपूर्ण चुनाव में राजनितिक ज़मीन पर शर्म से नज़रें गड़ाये धराशायी होकर धूल चाट रहे हैं। एक दो को छोड़कर बाकी क्षेत्रीय पार्टियों के गद्दावर नेताओं का भी लगभग वही हश्र हुआ है इस विशेष चुनाव में, जो कांग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। याद कीजिये ये सब वही नेता हैं जो दिल्ली में संसद से सत्ता के अभिमान में चूर आम जनता के साथ अरविन्द और अन्ना पर तीखे तीखे तंज कस रहे थे, प्रहार कर रहे थे, उनकी जायज़ मांगों का अपमान कर रहे थे। कहते हैं न आदमी के कर्म उसका पीछा नहीं छोड़ते, ठीक वही हुआ है आज। इनका ये हश्र तो उसी क्षण तय हो गया था जिस पल उन्होंने दिल्ली में आम आदमी, आम जनता का मज़ाक उड़ाने का दुस्साहस किया था जिसने उन्हें कई बार सत्ता के इस शीर्ष आसन पर बिठाया था। 

दुर्भाग्यवश इस चुनाव में अरविन्द केजरीवाल जैसे ईमानदार महानायक को देशवासियों ने राष्ट्रीय स्तर के चुनाव में वोह साथ नहीं दिया जो उसे दिल्ली के विधानसभा चुनाव में मिला था, मतदाताओं ने उसे वो शक्ति नहीं दी जिसकी आशा अरविन्द को इस चुनाव में थी और थोड़ी बहुत मुझे भी। लग रहा था जैसे पूरा भारत बदलाव चाहता है। शायद भारतवासी इस आम चुनाव में मीडिया के बिछाए जाल और चालों में फंस कर उसकी सच्ची निष्ठां और नियत पर शक कर उसे पहचान नहीं सके, उसे ठीक से परख नहीं पाये। 

चुनाव से पहले, इस महान नेता के चरित्र पर बेरहम मतलबपरस्त मीडिया हर रोज़ एक के बाद एक गोले दाग़ता गया, उसके पाक साफ़ दामन पर दाग़ लगाता गया, उसे ग़ैर जिम्मेदार, भगोड़ा, प्रधानमंत्री पद का लालची बताता गया। अरविन्द को अगर सत्ता का मोह होता तो वो दिल्ली में बैठकर दूसरे भ्रष्ट नेताओं की तरह देश को लूटने में लग जाता जो इस देश की परम्परा रही है, उसे देश की परवाह नहीं होती तो वो अपने बच्चों के ऊपर ली कसम इस देश के बच्चों के लिए नहीं तोड़ता, उसे लोगों को धोखा देना ही होता तो वोह आम आदमी के अधिकारों और हुकूक के लिए कभी भूख हड़ताल पर नहीं बैठता। दिल्ली वालों के अधिकारों की रक्षा के लिए वो मुख्यमंत्री रहते हुए धरने पर नहीं बैठता। जनलोकपाल के विरुद्ध दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी की सांठगांठ और दोस्ती देख अरविन्द ने महसूस कर लिया था कि वो दिल्ली की सत्ता पर बैठ कर दिल्ली वालों के लिए कुछ नहीं कर सकता तो देश कैसे बदल सकता है।  
कितनी अजीब बात है कि दिल्ली का चुनाव जीतने के बाद भी इस देश की कुव्यवस्था और कांग्रेस और बीजेपी के गठजोड़ कारण अरविन्द केजरीवाल असहाय और निरीह सा बन चुका था। सत्ता के शीर्ष आसन पर बैठकर भी वह देश वासियों के सपने पूरे करने में असमर्थ था। उसकी मानसिक पीड़ा केवल वो ही महसूस कर सकता था।  फिर उसने सबकी उम्मीद से परे, अपने देश के लिए वो ऐतिहासिक कदम उठाया जो पहले कही किसी मुख्यमंत्री ने सोचा तक नहीं, उस सत्ता को त्याग देने का निर्णय जिसके भरोसे पर उसने दिल्ली वालों को जनलोकपाल कानून बनाने का भरोसा दिया था। 

लेकिन बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने मिलकर परदे के पीछे की सांठगांठ के चलते दिल्ली के मुख्यमंत्री को शक्तिहीन बना दिया। अरविन्द की नज़रों में दिल्ली की सत्ता का कोई अर्थ नहीं रह गया था जो दिल्ली वालों के काम न आ सकी । दिल्ली में रहकर पुरे देश को बदलना संभव नहीं था तो उसने राष्ट्रिय चुनाव में उतरने की ठानी जो निर्णय इस देश की किसी भी राजनैतिक पार्टियों के गले नहीं उतरा। उसे पद और धन कमाने की लालसा होती तो वो कभी दिल्ली वासियों को दिए जनलोकपाल के वचन के लिए मुख्यमंत्री के पद का बलिदान नहीं करता।

बिना सोचे समझे लोगों ने मीडिया पर विश्वास कर लिया और अरविन्द की क्रांति और बदलाव की आंधी का साथ छोड़कर मोदी की लहर को समर्पित कर दिया। मुझे पूरी आशा है वो दिन अवश्य आएगा जब ये समूचा देश फिर से जागेगा, अरविन्द की देश बदलने की निष्ठां और संकल्प को पहचानेगा और अपनी गलती का अहसास कर उसे दोबारा गले लगाएगा। 

शायद आपको मेरी बात पर विश्वास न हो अगर में ये कहूँ कि नरेंद्र मोदी की इस ऐतिहासिक जीत में अरविन्द केजरीवाल का बहुत बड़ा हाथ है। कांग्रेस के खिलाफ जो देशभर में चुनाव से पहले माहौल बना, उसका असली नायक अरविन्द और उसका जन आंदोलन ही है जिसने भ्रष्टाचार और महंगाई से त्रस्त जन जन को जागृत कर एकतासूत्र में बांधा और जनक्रांति का सिपाही बनाया। उसकी जीत में काफी योगदान हमारे भारत के बिकाऊ मीडिया का भी है जो इस देश की पूंजीपतियों की अप्रत्यक्ष ताक़तों के इशारे पर दिनरात मोदी मोदी का जाप करने में जुट गया और आम आदमी पार्टी के खिलाफ लोगों के दिलों में ज़हर घोलने में पूर्णरूप से सफल हो गया।  

मैं ये भी मानता हूँ की मोदी की इस भव्य विजय में मोदी की अपने भाषणों और रैलीयों के दौरान लोगों के दिलों में उतरने की कला और उनके साथ अटूट संपर्क कायम रखने की प्रभावी शैली भी है जिसमें अरविन्द आज काफी हद तक पीछे है। अपने इरादों को अमली जामा पहनाने के लिए, इस कला को सीखना और उसमें परिपूर्ण होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने दिल में देश को और देश की सड़ी गली व्यवस्था को बदलने की सच्ची भावना का रखना। बीजेपी की इस ऐतिहासिक विजय में कांग्रेस के नेताओं की एक के बाद एक नाकामियां, सत्ता के नशे में चूर होकर अनर्गल बयानबाज़ी करते हुए मोदी को चाय की दुकान के लिए जगह देना, भ्रष्टाचार, महंगाई और जनसेवा भाव को भूल जाना भी है। अगर आपने मेरी पोस्ट पहले पढी हो तो आप मेरी भविष्यवाणी अवश्य जानते होंगे जिसमें मैने कहा था कि २०१४ के चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी अपना राष्ट्रीय स्तर खो देगी। देश की भलाई के लिए हुआ ठीक वैसा ही। जनता ने कांग्रेस चुनाव में उसे इतना मत भी नहीं दिया जिसके बल पर वो संसद में मुख्य विपक्षी दल बन सके जिसके लिए कम से कम 10% संख्या की आवश्यकता होती है। 

नरेंद्र मोदी के साक्षात्कारों से देशप्रेम, कर्मठता और प्रतिबद्धता की कभी कभी झलक तो दिखाई देती है और उसके अटूट संकल्प पर थोड़ा बहुत विश्वास करने को मन भी करता है पर पूर्ण रूप से नहीं क्योंकि बीजेपी में उसके आस पास बहुत से भ्रष्ट, अवसरवादी और अविश्वश्नीय चेहरों की भीड़ दिखाई देती है जो संदेह पैदा करती है। नरेंद्र मोदी पर तो विश्वास एक बार किया जा भी सकता है पर बीजेपी पर नहीं। 

मैं एक बात दोहराना अवश्य चाहूँगा यहाँ कि मैंने बरसों पहले २०-२५ बीजेपी के नेताओं को लिखकर प्रार्थना की थी कि कांग्रेस को आने वाले चुनाव में मात देने के लिए उन्हें प्रधान मंत्री के प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम की जल्द से जल्द घोषणा करना चाहिए क्योंकि बीजेपी में वही एक सबसे अधिक लोकप्रिय नेता था जो इस रावणरूपी विराट कांग्रेस का मुकाबला कर सकता था। और ख़ुशी इस बात की थी कि उसे चुना भी गया। मगर आज मुझे अरविन्द और मोदी में से किसी एक को चुनना हो तो मैं बिना हिचकिचाये केवल अरविन्द को ही चुनूंगा। क्योंकि मैं मानता हूँ की कांग्रेस और बीजेपी की सोच, विचारधारा और दृष्टिकोण में बदलाव लाने वाला केवल अरविन्द ही है। 

बीजेपी की इस अतुलनीय विजय का नीचे दिया ब्यौरा और चित्र स्वयं उल्लेख कर रहा है कि नरेंद्र दामोदर राव मोदी की लहर कैसे सुनामी में परिवर्तित होकर पूरे देश को अपने बहाव में ले डूबी।

BJP               283
Congress       43
AIDMK           36
TMC              34
Shiv Sena      19
BJD              20
TDP              16
TRS              12
AAP              
04
मोदीमय भारत 

Wednesday, May 14, 2014

THE CORRUPTION WOULD ALWAYS DANCE OVER OUR HEADS UNTIL...

Even after the great revolution that was spearheaded by Arvind at Delhi couple of year back, the corruption in India is spreading its deadly tentacles so rapidly these days that it is something no one would be able to digest. What seems to be wrong with India that the corruption can not be tackled effectively here. 

The statistics about corruption are damn so alarming and disturbing that it troubles my mind to such an extent that I feel pretty helpless to understand as to why the corruption is mushrooming all around us in Indian societies especially in the times when the FIGHT AGAINST CORRUPTION is being fought aggressively. 

It is indeed a matter of great worry for us when we read in the news that within the short span of mere four months this year, our country's ACB (Anti corruption bureau) has trapped 508 public servants in graft cases in Maharashtra State itself. Where as in the entire previous year, ACB had nabbed only 281 officials in this state. If it goes on at this pace, one can safely imagine how many more would be caught by ACB in 2014. 

The govt. departments where the public servants were arrested are from state home department, revenue department, municipal corporation, state electricity distribution company and land records. The facts become more shocking to learn that a few senior police inspectors were nailed red-handed while taking bribes in police stations itself. 

The only reason why this demonic menace is still dancing over our heads and not being controlled till date is that the public servants are not being punished heavily by our prevalent system for their corrupt practices. When caught, all they get is soft punitive reward in terms of suspension letter and at times they are merely transferred to distant places by their seniors officers who are usually hand-in-glove with them. It is nothing but a sort of safe protective layer around them which is meant to suggest that the action has been taken against erring officials. These actions can not be designated as effective deterrents at all for others. 



The CAG report has also indicted a few ministers for land grabbing in Maharashtra on high level administrative posts. While they are making hey, on the other side, the poor farmers are committing suicides in penury.

sadly, I hardly observe the impact of revolution and fight against corruption in this country. The corruption I believe would stay right here over our heads until we all decide in principle to support and give power to an utterly honest leader like ARVIND KEJRIWAL who is fighting relentlessly to eradicate the current political, administrative and judicial system with the effective tools like transparency and accountability. 

UNITED WE STAND
DIVIDED WE FALL 

Monday, May 12, 2014

GREATEST REWARD OF HONESTY IN INDIA IS DEATH...

NO PROTECTION TO HONEST PEOPLE IN INDIA

HOW MANY MORE HONEST RTI ACTIVISTS ARE TO SACRIFICE THEIR LIVES ON THIS SOIL...

'If you probe against us, this is what you get in return' is the clear message given by corrupt & influential people in India...
GREATEST REWARD OF HONESTY
If you may remember, Rahul Gandhi has repeatedly spoken in his speeches that Congress has given RTI bill to this country and takes great pride for this achievement whenever he gets an opportunity to talk about it. It is also the brutal fact that this country has witnessed a series of ruthless killings of RTI activists all over country whenever these brave people tried to probe into illegal dealings of powerful politically connected people through this right to information act for transparency. It is about time Rahul must confess adding a few more candid words that the Congress has also overlooked the right to protection to RTI activists in India along with this important bill. 

Recently, the local land mafia in barbaric retaliation against illegal encroachment probe initiated through RTI queries, openly burnt an honest RTI activist, Chandra Mohan Sharma, to death in his car near Eldeco Crossing in Greater Noida in the early hours of last Friday. In vehement protest against this atrocious injustice, out of all the political outfits only AAP volunteers staged a peaceful candle march from India Gate but surprisingly Delhi cops showing no sympathy towards this killing swung into action & detained the protesters on the poor grounds that AAP members hadn't taken due permission for this march sending clearly an ugly signal that they wouldn't allow anybody take even peaceful & democratic protest in this country as if they too detest the provision of RTI act with which people are exposing illegal activities. 


ISN'T THIS COUNTRY MARVELOUS!

Aam Aadmi Party has alleged that police have been reluctant to investigate this killing though they were given enough leads by the victim's family. One thing is significant to note here that Chandramohan had given a written complaint on 29th April, 2014 about the life-threatening calls he had been receiving from the the land mafia but cops did literally nothing to protect his life as though he deserved to die for he had dared to delve into encroachment on the temple land of Kasna village. 

Sadly, the cops are giving a different version altogether that it might be a case of accidental fire that has taken his life since the doors were shut. Can you digest a person traveling in his car with doors and windows closed especially when air-conditioning is not working.

The life protection of the citizens merely lies in the advertisement of political parties. Who is supposed to protect these honest whistle blowers?

Only god knows how more blood the Indian government is going to see before it reacts to find some permanent solution to stop these poor killings of RTI activists all over India or it would go on and on until a leader like Arvind Kejriwal comes to power to put an end to it. 

No doubt that RTI Act is a powerful tool to expose powerful people but unfortunately the leaders who gave it to the indians are yet to offer due protection to them. How long would these brave people remain like sitting ducks in India? How long would these innocent people have to put their lives on stake to find the truth?

Friday, May 9, 2014

WATCH OUT INDIANS, YOUR COUNTRY IS BEING SOLD EVERY SECOND....

IF YOU LOVE YOUR NATION, PLEASE DO WATCH THIS & KNOW HOW OUR COUNTRY IS SOLD TO INDUSTRIALISTS.... 
RAISE YOUR VOICE & SAVE THIS NATION FROM BEING SOLD

Google Hangout on Fri 10.30 pm IST Fri 9, May 2014


Guest: Paranjoy Guha Thakurta, Author of a recently published book Gas 

Wars – Crony Capitalism And The Ambanis”
More information on the book can be found here http://www.gaswars.in/

Topic: Paranjoy will discuss at length his book, his experiences - the research process and his findings, its implications both short and long-term, the impact of gas pricing on the economy as a whole and broader issues like crony capitalism that lie at the heart of corruption scandals, all in light of the elections that are underway in India.

When: 10.30 pm IST Fri 9, May 2014

Where: You can watch live at http://myaap.in/hangout

Submit questions live on the youtube page where you watch the hangout.
Our prime minister, Manmohan Singh has been accused of favoring "RELIANCE GROUP' by changing ministerial portfolios offering special privileges to them. It is believed that 'RELIANCE GROUP' deliberately squatted on reserves of gas and reduced production at the site against the interest of the nation only with an intent to get whopping profits later. Many people in the government rose voices against it too but interestingly some of them powerful key players in our government are believed to have supported the group for their personal interests. 

Though the group denies the allegations but we all know, there is no smoke without fire. CAG, The Comptroller and Auditor General of India has alleged that amongst many other irregularities on national gas reservoir, the contract between the Government and Reliance Industries limited is full of flaws that allows undue favor to the group and undermines the national interests of the country. 

Tuesday, May 6, 2014

अमेठी में अनहोनी की आशंका और शत्रु की जीत का डंका ...

राहुल गांधी हार की कगार पर 

पहली बार, कांग्रेस के राजकुमार, राहुल गांधी की अमेठी में हार का लगभग सारा साजो-सामान लगभग तैयार हो चुका है।  लगता है कि अब उनके ५०० करोड़ रुपयों के विज्ञापनों की झड़ी और ५०० किलो गुलाब की पंखुड़ियां सब बेकार होने वाले हैं। देशी विदेशी चुनाव सर्वेक्षणों के अनुसार राहुल की लोकप्रियता अमेठी में क़रीब क़रीब स्माप्त हो चुकी है। कांग्रेस की कमर तोड़ने का साहस और योग्यता केवल कुमार विश्वास में है, ये अरविन्द ने पूरे देश को दिखा ही दिया क्योंकि इस से पहले कभी भी राजनैतीक सांठगांठ के चलते, किसी भी राजनैतिक पार्टी ने अपना उम्मीदवार अमेठी में खड़ा करके, कांग्रेस के इस शाहजादे के सर से सत्ता का ताज छीनने का दुस्साहस नहीँ किया था।  

कांग्रेस के गढ़ में ही राहुल की हार, ये तो बडे शर्म की और ड़ूब मरने जैसी बात हो जायेगी कांग्रेसियों के लिये। मगर प्रियंका वाड्रा का भाई के लिये चिंतित होकर मजबूरन अमेठी में हर रोज़ नुक्कड़ सभाएं करना, माँ सोनिया का दस साल में पहली बार बेटे के लिये अमेठी आकर प्रचार करना, बेटे की विजय के लिये वोटोँ की गुहार लगाना, पीढ़ी दर पीढ़ी पारिवारिक रिश्तों को जोड़ना, ऱाहुल द्वारा कांग्रेस की सोच को बढ़ चढ़ कर भगवत गीता की सोच बताना, समाजवादी पार्टी का राहुल के विरुद्ध अपना उम्मीदवार न खडा करना, कांग्रेस के तक़रीबन सभी शक्तिशाली अस्त्र-शास्त्र बेअसर और व्यर्थ दिखने लगे हैं, कांग्रेस के गढ़ में इस बार।

कल दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी भी पहली बार कांग्रेस के अपराजेय दुर्ग में पहुंचकर अपने चुंनिंदा तूफानी शब्दोँ से गरजते हुये कांग्रेस की दुर्गति करने में पीछे नहीं रहे, स्मृति ईरानी को अपनी बहन बताकर रिश्तोँ की दुहाई देने और भावनाओं को भुनाने में काफी हद तक कामयाब भी दिखे गुजरात के मुख्यमंत्री। यहाँ भी बहन के लिए भाई का प्यार, सच में गज़ब की ऊर्जा और स्फूर्ति थी अमेठी के इस चुनावी घमासान जंग में उनमें। अब तक का सबसे बहरीन और प्रभावी भाषण लगा अमेठी में इस बार उनका। उमा भारती जी का ये कहना कि मोदी बीजेपी के अच्छे वक्ता नहीं, कम से कम मेरी तो समझ से बाहर है।

देश को इस  समय किसी चालाक राजनेता या निपुण वक्ता की अवश्यक्ता नहीं जो लोगोँ की भावनाओं को उत्तेजित कर अपने लिये वोट बटोरे, जो पूंजीपतियों के हेलीकॉप्टर्स और धन को अपने चुनाव जीतने  के लिये उपयोग करता हो, किसानों की जमीन छीन कर धन्नासेठों को मुफत में देता  हो, देश को वो नेता भी नहीं चाहिए जो केवल अपने लक्ष्य को पाने के लिये नापतौल कर अपने शब्दोँ का चयन कर सत्ता पाने की लालसा रखता हो,  देश को ऐसा नेता चाहिए जो लोगों को अपने अधिकारों के लिये जागृत करे, देश में बदलाव की आन्धी पैदा कर अपनी आवाज़ पर देशभर में क्रान्ती लाने का दम रखता हो  और वक्त आये तो उनके अधिकारों के लिये अपनी सत्ता का भी बलिदान कर दे. 

अमेठी में कुछ भी हो, जीत हार किसी की भी हो,अपने देश के निर्भीक महानायक अरविन्द केजरीवाल को सलाम ठोकने को दिल ज़रुर करता है जिसने पहली बार सबकी कल्पना से परे अमेठी में राहुल के विरूध कुमार विश्वास को भेजकर इतिहास रचा। यही नहीं, मोदी के मज़बूत किले बनारस में उसके खिलाफ़ खुद खडे होकर मोदी की लहर को उल्टा बहा ले जाने की हिम्मत की। इतना अदम्य और अतुलनीय साहस बिरले ही रखते हैं दोस्तों। और क्यों न हो, चुनौतियों के इस  माहौल में देश की व्यवस्था को बदलने का लक्ष्य कोई छोटा मोटा काम थोड़े ही है।  इस वीडियो को देखकर भी अहसास न हो तो इस देश का ईश्वर ही मालिक है। 

video

इसमें कोई शक़ नहीं कि २०१४ के इस महत्वपूर्ण चुनाव के असली बाज़ीगर तो नरेन्द्र मोदी ही हैं, अपने राजनितिक कौशल और बरसों के अनुभव के बल पर और कांग्रेस के विरुद्ध देशभर में चली आंधी में बाज़ी तो वो ही मारेंगे इस चुनाव में, बस देखना ये बाकी है कि जनता अरविन्द केजरीवाल की ईमानदारी का उसे कितना इनाम यांनी कितनी ताकत देतीं है इस देश को बदलने और सत्ता के इन पुराने महारथियों से भिड़ने के लिये। 

आज न सही, आने वाले समय में इस देश का अनजान वर्ग एक दिन ज़रूर अरविन्द केजरीवाल के गुणों को पहचानकर उसे वोह शक्ति अवश्य देगा जिस के बल पर अरविन्द अपने लक्ष्य तक पहुंचकर भ्रष्टाचारमुक्त भारत का निर्माण कर सके  । 

जयहिंद ! जय भारत !